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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 50
आत्मस्वरूपविज्ञानादज्ञानस्य परिक्षयः। क्षीणेऽज्ञाने महाप्राज्ञ रागादीनां परिक्षयः ॥
जब आत्मा का ज्ञान विधिवत प्राप्त हो जाता है तो अज्ञान समाप्त हो जाता है। अज्ञान के पूर्णतः क्षय हो जाने पर आसक्ति तथा स्नेह आदि भी नष्ट हो जाते हैं।
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