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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 44
उत्थानं च शरीरस्य चिह्नमेतज्जितेऽनिले। एवमभ्यसतस्तस्य मूलरोगो विनश्यति ।।
ऐसे अभ्यासों के परिणामस्वरूप शरीर और मन से संबंधित सभी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।
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