मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 42
निख्य वायुना दीप्तो बद्धिष्ठति कुण्डलीम्। पुनः सुषुम्नया वायुर्वह्निना सह गच्छति ॥
उसमें श्वास रोकने से कुंडलिनी में विधिवत प्रज्वलित अग्नि स्थापित हो जाती है। श्वास इस अग्नि को अपने साथ लेकर सुसुम्ना के मार्ग से ऊपर की ओर उठने लगती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जाबाल दर्शन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

जाबाल दर्शन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें