विनायकं च संस्मृत्य तवा वागीश्वरी पुनः। लिङ्गनालात्समाकृष्य वायुमण्यप्रतो मुने ॥
योगी को साथ-साथ मां वागीश्वरी और गणेश का भी ध्यान करना चाहिए, इसके बाद ओम का एक बिंदुमात्र के साथ जाप करना चाहिए और
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जाबाल दर्शन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जाबाल दर्शन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।