गुदा और जननेन्द्रिय के मध्य में विद्यमान तंत्रिका को सिवानी कहते हैं। यह शरीर के आधे अंगों को जोड़ता है। विद्वान को अपने बाएँ और दाएँ टखने का उपयोग करके उस सिवनी को दबाना चाहिए और घुटनों के नीचे के जोड़ पर त्रयम्बक नामक ज्योतिर्लिंग की कल्पना करनी चाहिए।
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