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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 32
शिरोरोगा विनश्यन्ति सत्यपुक्तं हि सांकृते। स्वस्तिकासनमास्थाय समाहितमनास्तथा ॥
मन को एकाग्र करना चाहिए, स्वस्तिक का आसन स्थापित करना चाहिए, प्रणव का जप करना चाहिए, अपान वायु को धीरे-धीरे ऊपर उठाना चाहिए और दोनों हाथों से कान आदि ज्ञानेन्द्रियों को विधिवत दबाना चाहिए।
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