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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 24
सर्वरोगनिवृत्तिः स्यान्नाभिमध्ये तु धारणात्। शरीरलघुता विप्र पादाङ्गुष्ठनिरोधनात्।।
इस वायु को नाभि के मध्य भाग में धारण करने से सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं तथा पैर के अंगूठे पर वायु के रुकने से शरीर में ताजगी का अनुभव होता है।
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