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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 2
वर्णत्रयात्मकाः प्रोक्ता रेचपूरककुम्भकाः। स एष प्रणवः प्रोक्तः प्राणायामस्तु तन्मयः ॥
प्रणव के तीन वर्ण अकार, उकार तथा मकार हैं, उन्हें क्रमशः पूरक, रेचक एवं कुम्भक से समानता रखने वाला कहा गया है। इन तीनों वर्णो के समूह को ही ओंकार बताया गया है। इस कारण से प्राणायाम भी प्रणव रूप ही है।
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