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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 17
प्राणश्चित्तेन संयुक्तः परमात्मनि तिष्ठति । प्राणायामपरस्यास्य पुरुषस्य महात्मनः ॥
प्राणायाम में सदा रत रहने वाले श्रेष्ठ पुरुष का प्राण चित्त के साथ संयुक्त होकर परमात्मा में स्थित हो जाता है और उसका शरीर क्रमशः धीरे-धीरे ऊपर को उठने लगता है।
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