हे सुव्रत! प्राणायाम के द्वारा चित्त पवित्र हो जाता है एवं उस पवित्र चित्त में अन्तः प्रकाशस्वरूप शुद्ध आत्म तत्त्व का धीरे-धीर साक्षात्कार होने लगता है।
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