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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 15
पूर्व पूर्व प्रकुर्वीत यावदुत्थानसंभवः । संभवत्युत्तमे प्राज्ञः प्राणायामे सुखी भवेत् ॥
जब तक ऊपर की ओर उठने की अनुभूति वाले प्राणायाम की सिद्धि प्राप्त न हो जाए, तब तक पूर्वोक्त विधि से दोनों तरह के प्राणायामों का ही अभ्यास करता रहे। उपर्युक्त उत्तम श्रेणी के प्राणायाम के पूर्ण हो जाने पर ज्ञानी मनुष्य सुखी हो जाता है।
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