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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 12
प्राणसंयमनेनैव ज्ञानान्मुक्तो भविष्यति। बाह्यादापूरणं वायोरुदरे पूरको हि सः ॥
वह पुरुष प्राणायाम के द्वारा ही स‌ज्ञान रूपी प्रकाश को प्राप्त करके संसार सागर से मुक्त हो जाता है। वायु को बाहर से खींचकर उदर के भीतर भरे जाने की प्रक्रिया को 'पूरक' कहा गया है।
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