एवं समभ्यसेन्नित्यं प्राणायामं मुनीश्वर। एवमभ्यासतो नित्यं षण्मासाद् ज्ञानवान्भवेत् ॥
हे श्रेष्ठ मुनीश्वर! इस तरह से प्रत्येक दिन प्राणायाम का अभ्यास निरन्तर करते रहना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन अभ्यास करते रहने से साधक मात्र छ: मास में ही ज्ञान-सम्पन्न हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जाबाल दर्शन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जाबाल दर्शन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।