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जाबाल दर्शन • अध्याय 6 • श्लोक 10
एवं समभ्यसेन्नित्यं प्राणायामं मुनीश्वर। एवमभ्यासतो नित्यं षण्मासाद् ज्ञानवान्भवेत् ॥
हे श्रेष्ठ मुनीश्वर! इस तरह से प्रत्येक दिन प्राणायाम का अभ्यास निरन्तर करते रहना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन अभ्यास करते रहने से साधक मात्र छ: मास में ही ज्ञान-सम्पन्न हो जाता है।
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