भगवान् दत्तात्रेय जी ने कहा - 'हे सांकृते! अब मैं तुम्हारे लिए प्राणायाम का क्रमशः वर्णन करता हूँ, इस विधि का श्रद्धापूर्वक श्रवण करो। इन तीनों पूरक, कुम्भक एवं रेचक के द्वारा जो प्राणों का संयम पूर्ण होता है, उसे ही प्राणायाम बतलाया गया है।
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