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जाबाल दर्शन • अध्याय 5 • श्लोक 11
नादाभिव्यक्तिरित्येतच्चिङ्गं तत्सिद्धिसूचकम् । यावदेतानि संपश्येत्तावदेवं समाचरेत् ॥
अनाहत नाद की अभिव्यक्ति होने लगती है। ये लक्षण ही सिद्धि के प्राकट्य का बोध कराते हैं। जब तक ये लक्षण दिखाई न दें, तब तक इसी तरह अभ्यास करते रहना चाहिए ।
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