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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 9
आसां मुख्यतमास्तिस्त्रस्तिसृध्वेकोत्तमोत्तमा । ब्रह्मनाडीति सा प्रोक्ता मुने वेदान्तवेदिभिः ॥
इन चौदह नाड़ियों में भी प्रथम तीन ही सबसे प्रमुख हैं। इन तीनों में भी एक ही नाड़ी 'सुषुम्ना' सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। शास्त्रज्ञों ने इसे 'ब्रह्मनाड़ी' के नाम से सम्बोधित किया है ।
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