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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 7
सुषुम्ना पिङ्गला तद्वदिडा चैव सरस्वती। पूषा च वरुणा चैव हस्तिजिह्वा यशस्विनी ॥
उनमें सुषुम्रा, पिङ्गला, इड़ा, सरस्वती, वरुणा, पूषा, यशस्विनी, हस्तिजिह्ना,
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