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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 5
तन्मध्ये नाभिरित्युक्तं योगज्ञैर्मुनिपुङ्गव । कन्दमध्यस्थिता नाडी सुषुम्नेति प्रकीर्तिता ॥
हे मुनि पुङ्गव! उस कन्द स्थान के मध्य भाग में नाभि केन्द्र है, ऐसा योग विज्ञानियों ने कहा है। कन्द के बीच में जो नाड़ी स्थित है, उसका 'सुषुम्ना' के नाम से उलेख किया गया है।
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