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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 47
श्रीपर्वतं शिरः स्थाने केदारं तु ललाटके। वाराणसीं महाप्राज्ञ ध्रुवोर्षांणस्य मध्यमे ॥
अपने इस देह में सिर के स्थान पर श्रीशैल नाम से युक्त तीर्थ स्थित है। ललाट में केदार तीर्थ प्रतिष्ठित है। हे महाप्राज्ञ ! नासिका एवं भृकुटी (दोनों भौंहों) के बीच में काशीपुरी स्थित है।
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