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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 46
यदा पिङ्गलया प्राणः कुण्डलीस्थानमागतः । तदा तदा भवेत्सूर्यग्रहणं मुनिपुङ्गव ॥
ठीक ऐसे ही जब प्राण पिङ्गला नाड़ी के माध्यम से कुण्डलिनी के क्षेत्र में आता है, तभी हे मुने! सूर्य ग्रहण का समय होता है।
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