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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 44
तदन्त्यं विषुवं प्रोक्तं तापसैस्तत्त्वचिन्तकैः । निःश्वासोच्छ्रासनं सर्वं मासानां संक्रमो भवेत् ॥
तब उस समय श्रेष्ठ तत्त्व का विचार करते हुए महान् ऋषियों ने अन्तिम विषुव योग की स्थिति कही है। सभी उच्छ्वास एवं निः श्वास मास-संक्रान्ति माने गये हैं।
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