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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 38
विश्वोदराभिधायास्तु भगवान्पावकः पतिः। इडायां चन्द्रमा नित्यं चरत्येव महामुने ।।
विश्वोदरा नाड़ी के देवता भगवान् अग्निदेव हैं। हे वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ महर्षे! चन्द्रमा देवता सदा ही इड़ा नामक नाड़ी में और
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