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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 31
उदान ऊर्ध्वगमनं करोत्येव न संशयः। व्यानो विवादकृत्प्रोक्तो मुने वेदान्तवेदिभिः ॥
उदान वायु ही ऊर्ध्व की ओर प्रस्थान करता है। वेदान्त तत्व के विशेषज्ञ विद्वज्जनों का मानना है कि व्यान वायु ही ध्वनि का व्यञ्जक है।
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