नाग आदि पाँचों वायु त्वचा एवं अस्थि में निवास करते हैं। हे सांकृते! उच्छ्वास अर्थात् श्वास को अन्दर की ओर खींचना, निःश्वास अर्थात् श्वास को बाहर निकालना तथा खाँसना, ये तीनों कार्य प्राण वायु में द्वारा सम्पन होते हैं।
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