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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 23
नागः कूर्मश्च कृकरो देवदत्तो धनंजयः। एते नाडीषु सर्वासु चरन्ति दश वायवः ॥
नाग, कूर्म, कृकर (कृकल), देवदत्त और धनञ्जय - ये दस प्राण वायु बताये गये हैं। ये प्राण समस्त नस-नाड़ियों में संचरित होते हैं।
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