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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 21
शङ्खिनी नाम या नाडी सव्यकर्णान्तमिष्यते। गान्धारा सव्यनेत्रान्ता प्रोक्ता वेदान्तवेदिभिः ॥
'शङ्खिनी' नाम की नाड़ी बायें कान तक स्थित है। विशेषज्ञो के द्वारा 'गान्धारी' नाड़ी की स्थिति बायें नेत्र तक व्याप्त बतायी गई है।
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