यशस्विन्याः कुहोर्मध्ये वरुणा सुप्रतिष्ठिता। पूषायाश्च सरस्वत्या मध्ये प्रोक्ता यशस्विनी ॥
यशस्विनी और कुहू के मध्य भाग में 'वरुणा' नाड़ी स्थित है। 'पयस्विनी' नाड़ी की स्थिति पूषा और सरस्वती के बीच में कही गई है।
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