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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 14
सरस्वती कुडूश्चैव सुषुम्नापार्श्वयोः स्थिते। गान्धारा हस्तिजिह्वा च इडायाः पृष्ठपूर्वयोः ॥
सरस्वती और कुरु सुषुम्ना के दोनों पाचों में स्थित हैं। इड़ा के पृष्ठ भाग में गान्धारी तथा पूर्व भाग में हस्तिजिह्वा प्रतिष्ठित है।
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