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जाबाल दर्शन • अध्याय 4 • श्लोक 13
स्वमुखेन समावेष्ट्य ब्रह्मरन्ध्रमुखं मुने। सुषुम्नाया इडा सव्ये दक्षिणे पिङ्गला स्थिता ॥
हे मुने! कुण्डलिनी अपने मुख से ब्रह्मरन्ध्र के मुख को ढक कर रखती है। सुषुम्रा के बायें भाग में इड़ा और दाहिने भाग में पिङ्गला स्थित है।
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