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जाबाल दर्शन • अध्याय 3 • श्लोक 6
दक्षिणेतरपादं तु दक्षिणोरुणि विन्यसेत्। ऋजुकायः समासीनो वीरासनमुदाहृतम् ॥
बायें पैर को दाहिनी जाँघ के ऊपर रखे तथा शरीर को सीधा करके बैठे, यही वोरासन है।
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