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जाबाल दर्शन • अध्याय 3 • श्लोक 5
ऊर्वोरुपरि विप्रेन्द्र कृत्वा पादतलद्वयम् । पद्मासनं भवेत्प्राज्ञ सर्वरोगभयापहम् ॥
हे विप्र! दोनों पैरों को दोनों जाँघों पर रखकर उनके अंगूठों को दोनों हाथों से पीठ के पृष्ठ भाग से पकड़ ले। इसी को पद्मासन कहा जाता है। यह आसन सभी तरह के रोगों का भय हटाने वाला है।
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