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जाबाल दर्शन • अध्याय 3 • श्लोक 3
समग्रीवशिरः कायः स्वस्तिकं नित्यमभ्यसेत्। सव्ये दक्षिणगुल्फं तु पृष्ठपार्श्वे नियोजयेत् ॥
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