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जाबाल दर्शन • अध्याय 3 • श्लोक 16
आसनं विजितं येन जितं तेन जगत्त्रयम्। अनेन विधिना युक्तः प्राणायामं सदा कुरु ॥
जिसने इन आसनों को जीत लिया, उसने सम्पूर्ण त्रिलोको को अपने वश में कर लिया। अतः हे साङ्कृते! इसी विधि से (योग) युक्त होकर तुम सदा ही प्राणायाम किया करो।
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