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जाबाल दर्शन • अध्याय 3 • श्लोक 12
मेड्रादुपरि निक्षिप्य सव्यं गुल्फं तथोपरि। गुल्फान्तरं च संक्षिप्य मुक्तासनमिदं मुने ॥
हे मुने! मेड्र (जननेन्द्रिय) के ऊपर बायें टखने को रखे तथा उसके ऊपर दायाँ टखना रखे, यह स्थिति भी 'मुक्तासन' कहलाती है।
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