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जाबाल दर्शन • अध्याय 2 • श्लोक 4
को वा मोक्षः कथं तेन संसारं प्रतिपन्नवान् । इत्यालोकनमर्थज्ञास्तपः शंसन्ति पण्डिताः ॥
मोक्ष क्या है और आत्मा कैसे तथा किस कारण से संसार-बन्धन को प्राप्त हुआ है, इन सभी बातों के विचार को ही तत्वज्ञानी जन 'तप' कहते हैं।
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