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जाबाल दर्शन • अध्याय 2 • श्लोक 14
वाचिकोपांशुरुच्चैश्च द्विविधः परिकीर्तितः। मानसो मननध्यानभेदाद्वैविध्यमाश्रितः ॥
वाचिक जप के दो प्रकार माने गये हैं, प्रथम 'उच्चस्वरयुक' और द्वितीय 'उपांशु' (फुसफुसाहट युक्त)। इसी तरह से मानसिक जप भी 'मनन' एवं 'ध्यान' के भेद से दो प्रकार का है।
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