यस्यैवं परमात्माऽयं प्रत्यग्भूतः प्रकाशितः । स तु याति च पुंभावं स्वयं साक्षात्परा मृतम् ॥
इस प्रकार से जिस पुरुष को यह परमात्मा अपनी आत्मा के रूप में अनुभव होने लगता है, वह परम पुरुषार्थरूप साक्षात् परम अमृतस्वरूप परमात्मभाव को प्राप्त कर लेता है।
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