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जाबाल दर्शन • अध्याय 1 • श्लोक 2
तस्य शिष्यो मुनिकरः सांकृतिर्नाम भक्तिमान्। पप्रच्छ गुरुमेकान्ते प्राञ्जलिर्विनयान्वितः ॥
उनके शिष्य मुनिश्रेष्ठ सांकृति नाम से प्रख्यात हैं। वे गुरु के परम भक्त हुए। उन्होंने एक दिन एकान्त में अपने गुरुदेव से विनयावनत होकर पूछा-
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