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ईश • अध्याय 1 • श्लोक 7
यस्मिन् सर्वाणि भूतानि आत्मैवाभूद् विजानतः। तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः ॥
जिस ज्ञानी के लिए सभी प्राणी आत्मा ही बन गए हैं, उसके लिए (जो इस एकत्व को देखता है) वहाँ कौन-सा मोह और कौन-सा शोक रह सकता है?
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