यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥
जो मनुष्य सभी प्राणियों को अपने आत्मा में ही देखता है, और अपने आत्मा को सभी प्राणियों में देखता है — वह किसी से घृणा नहीं करता (किसी से द्वेष नहीं करता)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ईश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।