असूर्याः अन्धेन तमसा आवृताः नाम ते लोकाः सन्ति ।
ये के च जनाः आत्महनः सन्ति ते प्रेत्य तान् अभिगछति ॥
वे लोक ‘असूर्य’ (सूर्यरहित, अंधकारमय) हैं, जो घोर अंधकार से आवृत हैं।
जो लोग आत्मा का हनन करने वाले हैं (आत्मज्ञान से दूर रहते हैं), वे मृत्यु के बाद उन्हीं लोकों को प्राप्त होते हैं।
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