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ईश • अध्याय 1 • श्लोक 3
असूर्याः अन्धेन तमसा आवृताः नाम ते लोकाः सन्ति । ये के च जनाः आत्महनः सन्ति ते प्रेत्य तान् अभिगछति ॥
जो लोक असूर्य (आत्मज्ञान से रहित और अज्ञानमय) कहलाते हैं, वे घोर अन्धकार से आच्छादित हैं। जो लोग आत्महन् (अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान न प्राप्त करके आत्मा का हनन करने वाले) हैं, वे मृत्यु के पश्चात् उन्हीं अन्धकारमय लोकों को प्राप्त होते हैं।
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