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ईश • अध्याय 1 • श्लोक 17
वायुरनिलममृतमथेदं भस्मांतं शरीरम्‌। ॐ क्रतो स्मर कृतं स्मर क्रतो स्मर कृतं स्मर ॥
यह प्राण (वायु) अमृत स्वरूप वायु में विलीन हो जाए; और यह शरीर भस्म (राख) बन जाए। ॐ! हे संकल्पशील मन (क्रतु), तुम अपने किए हुए कर्मों को स्मरण करो, स्मरण करो।
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