पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह।
तेजो यत् ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि
योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥
हे पूषन् (सूर्य), हे एकर्षे (सर्वद्रष्टा), हे यम (नियंत्रक), हे सूर्य, हे प्रजापति-पुत्र! आप अपनी किरणों को समेट लें, अपने तेज को समेट लें।
आपका जो सबसे कल्याणकारी रूप है, उसे मैं देखना चाहता हूँ।
वह जो पुरुष (परमात्मा) वहाँ है — वही मैं हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ईश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।