पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह।
तेजो यत् ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि
योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥
हे पूषन्(पालनकर्ता)! हे एकर्षे(एकमात्र गति देने वाले)! हे यम(नियन्ता)! हे सूर्य! हे प्राजापत्य(प्रजापति के पुत्र)! अपने तेजस्वी किरणों को समेट लीजिए और अपने प्रकाश को संकुचित कीजिए।
मैं आपके उस अत्यन्त कल्याणमय स्वरूप का दर्शन करना चाहता हूँ। जो वह पुरुष(परमात्मा) वहाँ स्थित है, वही मैं हूँ(सोऽहमस्मि)।
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