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ईश • अध्याय 1 • श्लोक 14
सम्भूतिञ्च विनाशञ्च यस्तद्वेदोभयं सह। विनाशेन मृत्युं तीर्त्वा सम्भूत्याऽमृतमश्नुते ॥
जो मनुष्य सम्भूति (प्रकट) और असम्भूति (अप्रकट) — दोनों को साथ-साथ जानता है, वह सम्भूति (नाशवान जगत की समझ) के द्वारा मृत्यु को पार करता है, और असम्भूति (सत्य/ईश्वर) के द्वारा अमृत (मोक्ष) को प्राप्त करता है।
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