अन्यदेवाहुः सम्भवादन्यदाहुरसम्भवात्।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥
सम्भूति(कार्यब्रह्म अथवा प्रकट सत्ता) से एक प्रकार का फल प्राप्त होता है, और असम्भूति(अव्यक्त कारणतत्त्व) से दूसरे प्रकार का फल प्राप्त होता है—ऐसा हमने उन धीर पुरुषों(तत्त्वदर्शी आचार्यों) से सुना है, जिन्होंने हमें इस तत्त्व का यथार्थ उपदेश किया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ईश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।