जो लोग असम्भूति (अप्रकट/प्रकृति या नाशवान कारण) की उपासना करते हैं, वे अंधकार में प्रवेश करते हैं; और जो केवल सम्भूति (प्रकट/सृष्टि या उत्पन्न वस्तुओं) में ही लगे रहते हैं, वे उससे भी अधिक अंधकार में जाते हैं।
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