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ईश • अध्याय 1 • श्लोक 12
अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽसम्भूतिमुपासते। ततो भूय इव ते तमो य उ सम्भूत्यां रताः ॥
जो लोग असम्भूति (अव्यक्त प्रकृति अथवा विनाशी कारणतत्त्व) की उपासना करते हैं, वे अन्धकारमय तम में प्रवेश करते हैं; और जो लोग केवल सम्भूति (कार्यब्रह्म, हिरण्यगर्भ अथवा उत्पन्न सत्ता) में ही आसक्त रहते हैं, वे मानो उससे भी अधिक गहन अन्धकार को प्राप्त होते हैं।
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