तथा हि । आत्मा नदी संयमपुण्यतीर्था सत्योदका शीलतटा दयोर्मिः ।
तत्राभिषेकं कुरु पाण्डुपुत्र न वारिणा शुध्यति चान्तरात्मा ॥
आत्मा एक नदी है जिसकी पवित्र सीढ़ियों में आत्म-संयम है, पानी में सच्चाई है, किनारों में अच्छा स्वभाव है और लहरों में दया है। हे पांडु पुत्र, इस नदी में स्नान करो। (भौतिक) जल से अन्तःकरण शुद्ध नहीं होता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।