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हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 83
अत एव हि नेच्छन्ति साधवः सत्समागमम् । यद्वियोगासिलूनस्य मनसो नास्ति भेषजम् ॥
इस कारण सत्पुरुष सज्जनों की संगति की इच्छा नहीं करते; क्योंकि उनके वियोग की तलवार से घायल हुए मन के लिये कोई औषधि नहीं है।
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