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हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 71
प्रतिक्षणमयं कायः क्षीयमाणो न लक्ष्यते । आमकुम्भ इवाम्भःस्थो विशीर्णः सन्विभाव्यते ॥
क्षण-क्षण क्षय होने वाले शरीर को (ऐसा करने के लिए) नहीं देखा जाता, बल्कि मृत होने पर उसी प्रकार देखा जाता है, जैसे पानी में रखा हुआ कच्चा घड़ा घुल जाता है।
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