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हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 50
अदेशस्थोहि रिपुणा स्वल्पकेनापि हन्यते । ग्राहोऽल्पीयानपि जले गजेन्द्रमपि कर्षति ॥
जो अपने देश से बाहर है, उसे कोई छोटा-मोटा शत्रु भी आसानी से मार सकता है, जैसे एक मगरमच्छ, यद्यपि छोटा होते हुए भी, एक शक्तिशाली हाथी को भी खींच सकता है।
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